मानव अधिकार दिवस का मुख्य सन्देश, मानवता को जीवंत रखना।
मानव अधिकार दिवस का मुख्य सन्देश, मानवता को जीवंत रखना।

आशीष तिवारी की रिपोर्ट:-
लखनऊ:- 10 दिसम्बर 2022 को पूरी दुनिया में मानव अधिकार दिवस के रूप में मनाया जा रहा है जिसमे दुनिया के हर व्यक्ति के अधिकार को सुरक्षित रखने के आधार तैयार किये जाने पर चर्चा हुई है। निश्चित रूप से आज का दिन हम सभी के लिए गर्व का दिन है पर इस बात को भी याद दिलाता है कि लोगों के अधिकारों की सुरक्षा होनी चाहिए पर हम कल से इस वादे को कितना अहमियत दे पाने के लिए अडिग रहते हैं यह बहुत महत्त्वपूर्ण है आज दुनिया का हर इंसान किसी न किसी रूप में दूसरे के अधिकार आधारित विकास का आधार तैयार कर सकता है न कि उसे अधर में छोड़ दे आज पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट बहराइच का नदी विस्थापित परिवारों का पुनर्वास पहल इसी प्रतिवद्धता का स्वरुप है पिछले 25 वर्षों से लगातार समुदाय को ऐसे तैयार करना कि वे अपने परिवार के हर एक सदस्य के लिए सम्मानपूर्व जीवन देने में सक्षम हो सके। पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट के निदेशक ध्रुव कुमार ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि घाघरा व राप्ती नदी विस्थापित परिवारों में रोजी रोटी का आधार समाप्त हो जाने के बाद एक बेहतर आजीविका विकल्प के साथ परिवार में बच्चों के गुणत्तापूर्ण शिक्षा के आधार को मजबूत करना, महिलाओं, पुरूषों और बच्चों में एक सम्मान व गरिमा का वातावरण तैयार करना हमारा मुख्य उद्देश्य है नदी विस्थापित परिवारों को अपने बच्चों के अधिकारों के सुरक्षा के लिए खुद आगे आना होगा उन्हें विद्यालय स्तर पर बच्चों की उपस्थित के साथ-साथ व्यवस्था सम्बन्धी आधार को पूरा करने के लिए आगे आना होगा। आज परिवार स्तर से लेकर ऊपर के सभी स्तरों पर लोग दूसरे के अधिकारों के कैसे हनन कर सकें के लिए बहुत सजग है और यह गरीबी का प्रमुख कारण बनता है। इस बैठक में जोगापुरवा गाँव की रामवती ने स्कूल में पढाई का वातावरण तैयार करने में सहयोग करने के लिए कहा तो गाँव के चतुरी, शकीना, रेखा, राजरानी, रामजस आदि ने परिवार स्तर पर पूरे गाँव का माहौल तैयार करने में योगदान देने के लिए कहा यह भी तय हुआ कि गाँव में पढाई छोड़ चुकी लड़कियों को फिर से स्कूल भेजने का मत्वपूर्ण फैसला गाँव के सभी लोगों ने मिलकर लिया। आज मानव अधिकार दिवस के अवसर पर जोगापुरवा में 150 से अधिक महिलाओं पुरुषों और बच्चों ने भाग लिया पंचशील डेवलपमेंट ट्रस्ट के राम तेज, रिंकी वर्मा, रिंकी कश्यप, मुन्नी देवी आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
