कचहरी के सीनियर असिस्टेंट के साथ हो गई 67000 रुपए की ठगी, एसएचओ मदेयगंज के बिगड़े बोल, कहा तुम लोगो के साथ ऐसे ही होना चाहिए
कचहरी के सीनियर असिस्टेंट के साथ हो गई 67000 रुपए की ठगी, एसएचओ मदेयगंज के बिगड़े बोल, कहा तुम लोगो के साथ ऐसे ही होना चाहिए
जीत नारायण
लखनऊ:- राजधानी लखनऊ में कचहरी के एक सीनियर असिस्टेंट के साथ 67,000 रुपए की ठगी हो गई। जब पीड़ित स्थानीय थाना मदेयगंज एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे तो उनके साथ हुई ठगी का एसएचओ ने जमकर मजाक बना डाला और उनके बोल बिगड़ गए। इतना ही नहीं एसएचओ ने कहा कि तुम कचहरी के लोगों के साथ ऐसा ही होना चाहिए, बहुत अच्छा हुआ जो तुम्हारे पैसे चले गए। पीड़ित ने कहा हमारी एफआईआर दर्ज कीजिए तो एसएचओ अभय प्रताप सिंह ने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए बड़ी ही अभद्रता से कहा कि तुम्हारी एफआईआर नहीं लिखेंगे जो करना हो कर लो जाकर और कहा साइबर क्राइम का मामला है हजरतगंज साइबर सेल जाओ इतना कहने के बाद पीड़ित को थाने से भगा दिया।
जब पीड़ित साइबर सेल पहुंचा तो वहां पीड़ित की शिकायत दर्ज कर ली गई और पीड़ित को करीब 33500 रुपए वापस करवा दिए गए। बाकी के बचे पैसे वापस कराने के लिए साइबर सेल में पीड़ित को बताया गया कि स्थानीय थाने पर जाकर एक एफआईआर दर्ज करवा दीजिए ताकि साइबर सेल की टीम और स्थानीय थाने की टीम मिलकर उन आरोपियों को गिरफ्तार कर बाकी बचे पैसे वापस करवा सके।
पीड़ित ने एसएचओ मदेयगंज से न्याय की गुहार लगाई और लिखित तहरीर देकर अवगत कराया कि वह वर्तमान में बतौर लिपिक अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन कक्ष संख्या 48 के कार्यालय में पदस्थ है उसके आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से बीते 31 अगस्त को सुबह 10 बजकर 26 मिनट 32 सेकेंड पर एक अनाधिकृत ट्रान्जेक्शन का मैसेज प्राप्त होता है, पीड़ित के ICICI BANK CREDIT CARD NUMBER 4748460785119004 रुपये 67,000/- काटे जाने हेतु ओ०टी०पी० की सूचना प्राप्त होती है। जबकि यह लेनदेन पीड़ित के द्वारा नहीं किया गया। आनन फानन में पीड़ित ने अपने मोबाइल के आई मोबाइल पे एैप से अपना बैलेंस चेक किया तो कुल धनराशि 468 रुपए दर्शित हुई जबकि पीड़ित द्वारा ऐसा कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया गया। पीड़ित ने इसकी शिकायत करीब 11 बजे आईसीआईसीआई बैंक के डिस्प्यूट सेल से कस्टमर केयर पर जरिए दूरभाष सूचना देकर सर्विस रिक्वेस्ट नंबर Sr. no. 928532234 दर्ज करा दिया तत्पश्चात 1930 पर सम्पर्क किया करीब 3 घंटे तक सम्पर्क करने पर भी तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए पीड़ित को कंपलेंट नंबर उपलब्ध नहीं कराई गई। पीड़ित शाम को लगभग 8 से 10 बजे के बीच मदेयगंज थाने में उपस्थित हो कर थाने में पदस्थ सिपाही के मोबाइल से लगभग 9:30 से 10 बजे के समय 12560 न० पर कॉल कर संपर्क किया। अभिस्वीकृति नं 33108230126655 द्वारा मैसेज (लगभग 22:10 मिनट पर प्राप्त हुआ। तत्पश्चात पदस्थ सिपाही द्वारा मार्ग निर्देशन करने पर अगले दिन साइबर सेल थाना हजरतगंज जाकर कंप्लेंट संख्या 4816 दर्ज करायी एवं संबंधित उपलब्ध दस्तावेज उपलब्ध कराये। इसके पश्चात दिनांक 05/09/2023 को थाना मद्देयगंज से किसी सिपाही/कर्मचारी द्वारा फोन कर मदेयगंज थाना में आकर मिलने को कहा गया। पीड़ित द्वारा जब उनसे मिला जाता है तो उनके द्वारा कहा जाता है कि सब कार्य साइबर सेल द्वारा ही किया जायेगा तब मेरे द्वारा उनको साइबर क्राइम सेल के सारे कागजात उपलब्ध कराये जाते हैं एवं मेरे द्वारा कहा जाता है कि इस संबंध में उचित कार्यवाही करें। इसके पश्चात दिनांक 05/09/2023 को मैसेज द्वारा अभिस्वीकृति न 33108230126656 इस कंप्लेंट के बंद किए जाने की सूचना प्राप्त होती है जो कि अत्यंत दुखद था। इसके पश्चात साइबर सेल के प्रयास से मुझे दिनांक 06.09.2023 को पता चला कि दिनांक 02.09.2023 को मुझे मेरे क्रेडिट कार्ड एकाउंट में रिफण्ड स्वरूप 33,500/- मर्चेंट द्वारा वापत प्राप्त हुए तथा बताया गया शेष धनराशि रूपये 33500/- हैकर्स के द्वारा हवाई टिकटों का उपयोग कर ली गयी है जो प्राप्त नहीं हो सकी। इसके लिए साइबर सेल थाना हजरतगंज द्वारा प्रार्थी को संबंधित थाना मदेयगंज में जाकर एफआईआर दर्ज करने के लिये निर्देशित किया गया एवं यह भी बताया गया कि साइबर सेल द्वारा सारी जानकारी थाना मद्देयगंज को उपलब्ध करा दी गयी है लिहाजा आप वहां संपर्क कर आगे की विधिक कार्यवाही अमल में लाए ताकि शेष राशि आपको आपके खाते में जरिए रिफंड उपलब्ध करा दी जाएगी। इतना सब कुछ घटना क्रम होने के बावजूद भी एसएचओ अभय प्रताप सिंह मुकदमा लिखने में हीला हवाली कर रहे हैं। जब कचहरी के सीनियर असिस्टेंट का मुकदमा नहीं लिखा जा रहा है, सीनियर असिस्टेंट को न्याय नहीं मिल रहा है तो आम जनता को एसएचओ अभय प्रताप सिंह क्या ही न्याय दिलाते होंगे। जब पत्रकार द्वारा इस संबंध में एसएचओ मदेयगंज से वार्ता की गई की गई तो उन्होंने कहा कि पीड़ित को बुधवार को थाने पर बुलाया गया है अगर मुकदमा बनेगा तो हम लिख देंगे। हालांकि खबर लिखने तक पीड़ित का मुकदमा नहीं दर्ज किया गया था।
