कवरेज करने गए पत्रकार का पुलिस ने छीना मोबाइल और पर्स। 

जीत नारायण ब्यूरो लखनऊ।

 

एसपी शामली अपनी पुलिस को बचाने में लगे, बैकफुट पर आई थाने की पुलिस। 

 

 

उत्तर प्रदेश:- मामला बीते सोमवार का शामली जिले के गढ़ी पुख्ता थाने का है। जहां पर अंकित द्वारा अपने खेत में लगे पेड़ों की कटाई का काम कर रहे थे की तभी संबंधित थाने की पुलिस ने विपक्षी शब्बीर के साथ मिलकर पेड़ों की कटाई को रोक दिया था तभी वहां से गुजर रहे पत्रकार अजीत श्रीवास्तव ने पुलिस द्वारा पेड़ों की कटाई को रोके जाने का कारण पूछा तो संबंधित थाने में तैनात दरोगा यशपाल ने बदतमीजी करना शुरू कर दिया और उल्टा पत्रकार को फर्जी मुकदमे में फंसा कर जेल भेज देने की धमकी देने लगे, तभी अजीत श्रीवास्तव ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया उसके बाद यशपाल दरोगा ने अजीत श्रीवास्तव का मोबाइल और पर्स छीन लिया। इसके बाद उन्होंने एसपी शामली को फोन कर जानकारी देने की पूरी कोशिश की लेकिन एसपी शामली ने उनका फोन नहीं उठाया और ना तो पलट कर फोन किया। इसी मामले में लखनऊ के पत्रकार द्वारा एसपी शामली को पूरे मामले से अवगत कराया उसके बाद भी एसपी शामली ने मामले का संज्ञान नहीं लिया। ऐसे में एसपी शामली पर बड़ा सवाल यह निशान खड़ा होता नजर आ रहा है कि जब पत्रकार के द्वारा उनको सूचना दी जा रही है बार-बार फोन किया जा रहा है और वह फोन नहीं उठा रहे हैं तो आम जनता का फोन कैसे उठाते होंगे ऐसे में शामली जिले में यदि कोई बड़ी घटना घट जाए और एसपी साहब को सूचना देनी हो तो एसपी साहब तो फोन ही नहीं उठाएंगे तो कैसे वहां कानून व्यवस्था में सुधार होगा। अजीत श्रीवास्तव जो की एक वरिष्ठ पत्रकार हैं और वर्तमान समय में मीडिया फॉर यू समाचार पत्र में कार्यरत हैं। जिसकी पुष्टि संपादक नीरज गुप्ता द्वारा की जा चुकी है। इस मामले की खबर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। और शामली जिले के क्षेत्रीय पत्रकारों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा रहा है क्षेत्रीय पत्रकारों का कहना है की गढ़ीपुख्ता थाने की पुलिस के द्वारा पत्रकार के साथ इस तरह की घटना शामली जिले में आम हो रही है। लखनऊ के पत्रकार द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से मामले की जानकारी एडीजी जोन मेरठ डीके ठाकुर के संज्ञान में लाया गया तब जाकर शामली जिले के कप्तान जागे और एडीजी जोन मेरठ को एक मनघडंत कहानी सुना दी लेकिन एसपी शामली यह भूल गए की सच के आगे झूठ नहीं टिकता। एसपी शामली द्वारा जो जानकारी एडीजी जोन मेरठ को दी गई वह पूरी तरीके से गलत बताई जा रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि एसडीएम ऊन कोर्ट में पेड़ कटाई या उस भूमि का कोई वाद दाखिल है जबकि सच्चाई इससे परे है जब क्षेत्रीय पत्रकार द्वारा एसडीम ऊन से इस मामले में वाद की जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि इस संबंध में कोई वाद व इस खसरा नंबर पर किसी प्रकार का कोई वाद नहीं दाखिल है। वहीं शामली पुलिस की फजीहत और मामले को बढ़ता देख एसपी शामली ने क्षेत्राधिकार सदर से पूरे मामले की जांच कराने का आदेश दिया है। गढ़ीपुख्ता थाने की पुलिस अपने आप को फस्ता देख पत्रकार अजीत श्रीवास्तव पर मोबाइल वापस लेने का निरंतर दबाव बना रही है, और आगे चलकर फर्जी मुकदमे में फसाने की धमकी भी दे रही है। 

वहीं पूरे मामले पर अजीत कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि यदि इस प्रकार का कोई वाद दाखिल है तो उसका वाद संख्या सामने लाया जाए ताकि सच सामने आये यदि इस प्रकार का कोई वाद नहीं दाखिल है तो दरोगा यशपाल सिंह के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। 

 

अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच कितने दिनों में पूरी होगी और क्या सच सामने निकल कर आता है। 

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