वर्षा ना होने से किसानों को धान रोपाई में हो रही असुविधा,चेहरे पर छाई मायूसी

रोहित जयसवाल ब्यूरो चीफ क्राइम
गोण्डा:- आपको बताते चलें कि वर्तमान, समय किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय है। इस समय किसानों के द्वारा खेतों में धान की रोपाई की जा रही है। धान की रोपाई के लिए किसानों को सबसे पहले बेड़न डालना पड़ता है उसके बाद धान की रोपाई की जाती है। इसलिए इस समय किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। क्योंकि वर्षा ना होने से किसानों के द्वारा रोपाई किए गए धान सूख रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ किसानों का कहना है कि महंगाई इतनी जोरों पर है कि हम लोग खेतों की सिंचाई करें या अपना भरण-पोषण। किसानों के द्वारा यह भी आशंका व्यक्ति की जा रही है कि अब हमारी फसलें नष्ट हो जाएंगी। क्योंकि वर्षा हो नहीं रही है वर्षा न होने से फसलें सूख रही है। वहीं किसानों के कहना है कि खेत सूख रहे हैं मिट्टी दरार ले चुकी हैं। अब कैसे हम लोग अपना जीवन यापन करेंगे और कैसे खेतों की सिंचाई करेंगे वहीं दूसरी ओर किसानों को अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई का भी डर सताने लगा है कि अगर समय से वर्षा नहीं हुई तो हमारी फसलें तो नष्ट हो ही जाएंगी साथ ही साथ हम लोगों के द्वारा जो पैसा रोपाई व धान की खाद डालने में किया गया है वह भी बेकार हो जाएगा। वही एक सहारा था जिसके द्वारा अपने बच्चों की आगे की पढ़ाई करते किंतु अब वह भी हमारी हाथों से जा रहा है। अब नहीं समझ में आ रहा है कि हम लोग करे तो क्या करे। दूसरी तरफ डीजल इतना महंगा है एक बीघे की सिंचाई करने के लिए कम से कम ४ लीटर डीजल की आवश्यकता होती है और इस प्रकार से देखा जाए तो हम लोग जितना पैसा सिंचाई में लगा देंगे उससे कम ही धान की पैदावार होगी। अब हम लोग क्या करें। किसानों का कहना है कि एक तरफ तो धान सूख रहा है तो दूसरी तरफ गन्ना भी सूखने की कगार पर है । हम लोगों का सहारा कौन होगा कैसे हम लोग अपना जीवन यापन करेंगे इसलिए हम सरकार से मांग करते हैं हम लोगों की सिंचाई के लिए कोई ऐसी व्यवस्था करें जिससे कि हम की अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें और अपना जीवन यापन भी कर सके। वही किसानों का कहना है कि अभी तक जो गन्ना हमलों के द्वारा भेजा गया था उसका पैसा भी नहीं आया अब हम लोग किसके सहारे और कैसे डीजल लाएं फिर खेतों की सिंचाई करें क्या हम लोगों का साथ देने वाला कोई नहीं है प्रकृति ने तो मुंह मोड़ ही लिया है सरकार भी लगता है मुंह मोड़ लिया क्या केवल चुनाव के वक्त ही किसानों का याद आता है सरकार को बाकी के दिनों में किसानों से कोई मतलब नहीं है हाय काश मेरा भी कोई सुनता अगर यही स्थिति रही तो हम लोग तो भूखे मरेंगे हमारे जानवर भी भूखे मर जाएंगे बिना चारे के क्योंकि उनको खिलाने के लिए कुछ नहीं रह पाएगा सब सुख जाएगा।
