लम्बी लम्बी समीक्षा बैठक और डाट खाते व अपमानित होते अभियन्ता  

अविजित आनन्द

!! वाह रे उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड !!

 

लखनऊ:- उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के वितरण निगमो मे मध्यांचल हो या दक्षिणाचल, पूर्वांचल हो या पश्चिमाचल या फिर हो केस्को सभी के प्रबन्धनिदेशक के पदो पर इन अनुभवहीन बडका बाबूओ ने कब्जा जमा रखा है और साथ ही पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष व प्रबन्ध निदेशक सभी जगह अनुभवहीन बडकऊ तैनात व मुस्तैद मिलते है, आता जाता कुछ नही बस जो मुह से निकल गया वह ब्रह्म वाक्या है, उसके लिए दबाव बनाना जानते है चाहे उसके लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशो की अवेहलना या अवमानना ही क्यो ना हो….. यह बडका बाबू लोग सबसे ऊपर है।

ऐसी एक घटना मे पाठको के सामने रखना चाह रहा हूँ कि वर्तमान मे प्रबन्ध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के पद पर काबिज बडकऊ ने किया था, उस आदेश मे लिखा था कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ही सभी डिस्कॉम के मीटर रीडिग की निविदाएं निकालेगा… उक्त आदेश पर मैने शक्तिभवन जा कर प्रबन्ध निदेशक से मिल कर नियमावली दिखाई और बोला कि जब नियामक आयोगो को वर्षीय रिपोर्ट अलग अलग जाती है, तो फिर यह निविदा कैसे निकाली जा सकती है और इस सम्बंध मे सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी दिखाया था जिसमे सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से हर डिस्कॉम को स्वयत कहा था और उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन को सभी डिस्कॉम और उत्पादन , पारेषण व अन्य विद्युत निगमो के बीच समन्वय स्थापित करने वाली संस्था मात्र कहा है और इस निविदा के विरुद्ध अपना विरोध भी दर्ज किया था और इस सम्बंध मे माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति भी दिखाई थी… परन्तु बडका बाबू तो बडका बाबू है इनको कहाँ नियम कानून की चिन्ता कहां…. अपने पद के अहंकार मे डूबे प्रबन्धनिदेशक पावर कार्पोरेशन लिमिटेड के पद पर अवैध रूप से बैठे बडकऊ ने कहा कि आप स्वतंत्र है आपको किसने रोका जाए आप जाए व करे मेरे विरुद्ध अवमानन का मुकदमा। मै नही मानता इस आदेश को! उक्त वार्तालाप के बाद मेरे द्वारा मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि को पत्र लिखकर कर सूचित भी किया…. परन्तु इन बडका बाबूओ के आगे किसकी चलती है सरकार व न्यायालय को गुमराह करने का तरीका कोई इनसे सीखे…. अगर हम जैसे पत्रकार इसका विरोध भी करे भी तो उसको इनकी तरफ से लडने के लिए अधिवक्ताओ की फौज खडी मिलती है और उन पर खर्च होने धनबल भी सरकार का ही होता है और हम जैसे मजबूर पत्रकार इन नियम विरुद्ध हो रहे कार्यो पर अपना विरोध ही दर्ज कराते रह जाते है और यह बडका बाबू भ्रष्टाचार करके निकल जाते है।

क्यो कि इनके मुँह से जो निकल गया तो उसे ब्रह्म वाक्य समझा जाऐ,,,उस आदेश को पूरा करने की जिम्मेदारी इन अभियन्ताओ पर होती है वर्तमान समय मे भी इन अनुभवहीन बड़के बाबुओ ने फिर से बडा घोटाला करने के लिए एक आदेश पारित किया हुआ है कि सभी डिस्कामों मे अलग अलग खरीदे जाने वाले विद्युत मीटरो की खरीद अब मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ही करेगा, पिछली बार आदेश था मीटर रीडिग के 1600 करोड के टेण्डर का, जिसमे एक बडा घोटाला हुआ था यहाँ तक कि मध्यांचल के देवीपाटन जोन मे कार्यरत टी डी एस नामक कम्पनी ने मीटर रीडरो की भर्ती के लिए रूपया 220000 मात्र प्रति मीटर रीडर वसूला था… यह मैं नही कह रहा मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मे अवैध रूप से बैठे बडकाऊ कहा रहे है यानि कि करेगे खुलेआम भ्रष्टाचार, जिसको जो करना है कर लो। वैसे इन घोटाले के विरोध मे ना तो कोई निदेशक बोलते है, ना अभियन्ता।

वैसे अभियन्ताओ की क्या बात करे…. यह तो अवैध रूप से नियुक्त बडकऊ की डॉट ही खाते रहते है और मजे की बात यह है कि गलती होती है इन अनुभवहीन बड़के बाबुओ और डाटे जाते है यह अभियन्ता… क्यो कि इन अधिकारी को तो कार्य का कोई अनुभव तो होता नही, बस आदेश देना है जिसे इन अभियन्ताओ या कहे इन बडका बाबूओ के हुक्म के गुलामो को पूरा करना है फिर वो कार्य नियम विरुद्ध ही क्यों ना हो, क्यो कि विरोध करने वाले लोगो को तो इन बडका बाबू लोगो तो अपने पैरो तले रौद दिया है,,,काम करने के समय यानि क्षेत्र मे रह कर अपने अधीनस्थ से बात कर समस्या को जानने व समाधान करने का समय होता है, तो उस समय यह बडकऊ लोग विडियां कान्फ्रेंसिंग करते है। कल ही की बात है कि 3ः00 बजे दोपहर से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू हुई, तो फिर शाम को 6 :00 बजे समाप्त हुई,,,, अब जब काम के समय तीन तीन घण्टे विडियो कॉन्फ्रेंसिंग होगी….. तो फिर कैसे होगी राजस्व वसूली…. और जब राजस्व वसूली नही होगी तो बडकऊ डाटते ही रहेगे है कि वसूली कम हुई मीटर रीडर काम नही कर रहे आदि बहुत बातो पर डाटे गये सभी अभियन्ता।

वैसे ध्यान देने वाली बात यह है कि ओटीएस के 15 दिन तो निकल गये इन समीक्ष बैठको व विडिओ कान्फ्रेंस मे तो अधिकारी काम कब करेगे और ऊपर से इन बडकऊ के दिए मनमाने मानक और उस पर अगर खरे नही उतरे, तो फिर निलम्बन और अन्य कार्यवाई तय…. तभी तो इस नाजायज दबाव मे काम करने को मजबूर अभियन्ता समीक्षा बैठको मे बेहोश हो कर गिरते है और रही बात मीटर रीडिग ना होने की या कम होने की तो इसके जिम्मेदार तो शक्तिभवन मे बैठे प्रबन्ध निदेशक उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन है जिन्होने नियम विरुद्ध निविदा निकाली और जब घोटाला हुआ तो इन्होने ऊपर बैठे अध्यक्ष के द्वारा सबको डाट भी पडावा दी है कि मीटर रीडर कम है काम नही हो रहा अरे अनुभवहीन आप तो वही बातकर रहे हो कि जबरा मारे रोए भी ना दे। खैर…. युद्ध अभी शेष है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *