प्रधानमंत्री आवास योजना की अनदेखी: सूडा के अफसरों की लापरवाही से अधूरा रह गया गरीबों का सपना  

वर्षों से पक्के घर की आस में गरीब परिवार — बरसात में टपकती छतें, दीवारों से झरता प्लास्टर, अफसरों की चुप्पी बनी रहस्यमय

जीत नारायण (ब्यूरो लखनऊ)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का मकसद था कि हर गरीब के सिर पर एक पक्का छत हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेशभर के हजारों गरीब परिवार अब भी अपने पक्के घर के सपने को पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

सूडा (SUDA) और डूडा (DUDA) के जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही और सुस्ती ने इस योजना को कागजों तक सीमित कर दिया है।

बरसात में टपकती छतें, फिर भी नहीं पसीजे अफसर

कई परिवारों के कच्चे मकानों की दीवारें अब कमजोर हो चुकी हैं। बरसात में छतों से पानी टपकता है, दीवारों से झरता प्लास्टर गिरने से बच्चों और बुजुर्गों की जान जोखिम में रहती है।

लाभार्थी बताते हैं कि उन्होंने करीब दो साल पहले डूडा कार्यालय में ऑनलाइन आवेदन किया था। जांच के बाद उन्हें योजना के तहत पात्र बताया गया, पर अनुदान राशि आज तक नहीं मिली।

स्थानीय निवासी रामकिशन, जो रिक्शा चलाकर परिवार पालते हैं, बताते हैं —

दो साल पहले आवेदन किया था, सब दस्तावेज जमा किए, लेकिन अब तक एक रुपया नहीं मिला। बरसात में घर टपकता है, बच्चे भीग जाते हैं, पर कोई सुनने वाला नहीं।”

PMAY 2.0 के नाम पर फिर से आवेदन, लेकिन नतीजा ‘शून्य’

2024 में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की नई गाइडलाइन आने के बाद सभी लाभार्थियों को पुनः आवेदन करना पड़ा। उम्मीद थी कि संशोधित सूची के बाद राहत मिलेगी, पर 11 महीने बीत जाने पर भी किसी को स्वीकृति नहीं मिली।

सूत्रों का कहना है कि लखनऊ समेत कई जिलों में सूडा द्वारा लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली गई थी, मगर “अनुदान वितरण” का आदेश अब तक जारी नहीं किया गया।

अधिकारियों का जवाब: “ट्रायल चरण में है मामला”

जब इस विषय पर सूडा की निदेशक अपूर्वा दूबे से पत्रकारों ने बातचीत की, तो उन्होंने कहा —

“यह मामला ट्रायल चरण में है, एक महीने के भीतर लाभार्थियों को अनुदान राशि उपलब्ध करा दी जाएगी।”

लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। न किसी लाभार्थी को पैसा मिला, न कोई सूचना जारी हुई।

😡 जनता में रोष, भरोसे पर उठ रहे सवाल

लाभार्थियों का कहना है कि अगर उन्हें समय पर अनुदान राशि मिल गई होती, तो आज उनके मकान बन चुके होते।

> “प्रधानमंत्री जी ने गरीबों को पक्का घर देने का सपना दिखाया था, पर अधिकारियों की लापरवाही ने इस योजना को मजाक बना दिया,”

ऐसा कहना है क्षेत्र की एक महिला लाभार्थी सावित्री देवी का।

अफसरशाही की धीमी गति से चरमराई योजना

सूडा और डूडा विभागों में फाइलें महीनों तक पड़ी रहती हैं। लाभार्थियों की शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं। कई जिलों में तो अभी तक दूसरी किस्त के लिए भी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

सूत्र बताते हैं कि कई जगहों पर पात्रता सूची में भी गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं।

🏠 प्रधानमंत्री का सपना, जनता की उम्मीद और अफसरों की अनदेखी

प्रधानमंत्री ने कहा था “2022 तक हर गरीब के पास पक्का घर होगा।” लेकिन 2025 में भी हजारों परिवारों की छतें अब भी टपक रही हैं।

सरकारी रिपोर्टों में दिखाए गए निर्माण कार्य और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। जनता पूछ रही है — क्या यह योजना वाकई गरीबों के लिए बनी थी या अफसरों के लिए आंकड़े जुटाने का साधन?

लोगों का कहना है कि सरकार की यह योजना तभी सफल होगी जब अफसरों को जवाबदेह बनाया जाएगा और लाभार्थियों को समय पर उनका अधिकार मिलेगा।

फिलहाल, गरीबों का पक्का घर अब भी “सरकारी फाइलों” में कैद है — और उनके सपने बरसात के पानी के साथ हर साल बह जाते हैं।

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