अंजुरी भर धूप, और शाम फिर कोहरे की बाहों में।
दामोदर उपाध्याय ब्यूरो चीफ
गोरखपुर:- सुबह दस बजे तक घने कोहरे के बाद सूरज बादलों से झांका गुनगुनी धूप शर्माते- शर्माते निकली….. परिंदों ने पंख फड़फड़ाये पर ओस से भीगे पंखों ने उड़ान भरने से इन्कार कर दिया। छुट्टी का दिन… थोड़ी राहत मिली … लेकिन ये अंजुरी भर धूप तो मुगालता देने आयी थी… चार बजते ही सर्द हवाओं ने गलन बढ़ा दी… और शाम हो गयी… कोहरे ने शाम-ओ- रात को अपनी बाहों में समेट लिया। दुबक गये। इस बीच रात का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री के आसपास राउंड करता रहा। टायरों-सूखे पत्तों और लकड़ियां बटोर कर अलाव जलाये फटा पुराना कम्बल ओढ़े इन कामगारों के लिए मुश्किल ये सड़कें सूनी होने लगी और लोग घरों में है कि अलाव की आग उनके जिस्म तो था जिससे रात में गलन या जमाव तेज ठंड पड़ने लगेगी। बच्चों और बुजुर्गों गर्म कर सकती है लेकिन पेट की आग कैसे शांत होगी। प्रशासन एलर्ट है और डीएम खुद राहत कार्यों का जायजा ले रहे हैं लेकिन मुफलिसों की शामत हैं… सड़कों फुटपाथों पर। सूत्र बताते हैं कि मौसम विभाग को आशंका है कि बीते दिन ना लौट आये। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2003 में आठ दिन तक पारा शून्य या उससे नीचे माइनस में राउंड कर रहा था। तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस था। वैसे बीते 50 साल में पारा 11 बार जमाव बिंदु तक पहुंच चुका है। इस बार भी यही हालत नजर आ रही है। डाक्टर यू. एस तिवारी के मुताबिक लंबे समय तक ठंड में बाहर रहने वालों के लिए फास्ट बाइट और हाइपोथर्मिया की स्थिति काफी खतरनाक मानी जाती है। हाइपोथर्मिया की यह स्थिति तब बनती है जब शरीर कोर का क्षमता कम होने से फाइट बाइट का खतरा भी रहता है। सुबह गुनगुनी धूप के बाद शाम होते-होते पारा और नीचे गोता लगा गया। 2.8 न्यूनतम तापमान शाम 6 बजे प्वाइंट तक पहुंचने की उम्मीद थी। देर रात की सूचना के मुताबिक मैदानी क्षेत्रों में घने कोहरे की चादर पसर लिया। कुल मिलाकर चार दिन में 57 वर्ष 2003 और 2013 का जनवरी थी। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर- और तेज शीत कहर का अनुमान है। तापमान 95 डिग्री फारेनहाइट या उससे रिकार्डेड मौतों को अपने नाम कर चुका महीना 19 साल बाद फिर पुराने फार्म मे पश्चिम हवाओं के चलते गलन बढ़ी है फिलहाल उत्तर पश्चिम और उत्तरी पूर्वी कम हो जाता है। शरीर में ताप उत्पादन और ये फरवरी तक जारी रह सकती है। फिलहाल सतर्क रहिये इस ठंड से….. जानलेवा हो रही है ये ठंड।
