पत्रकारों को सच दिखाना पड़ा भारी, दबंग ने रंगदारी का लगाया झूठा आरोप

अभिषेक कुमार संवाददाता
लखनऊ:- माल थाना क्षेत्रांतर्गत दो सज्जन पत्रकारों को सच दिखाना भारी पड़ गया। दबंग ने पत्रकारों पर रंगदारी का झूठा आरोप लगाकर दोनों पत्रकारों व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर के सुपुत्र विकास किशोर की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया। प्रशासन के आलाधिकारियों को गुमराह और थाने पर तहरीर दिए बिना ही उक्त तहरीर को सोशल मीडिया पर वायरल किया गया व उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को धूमिल करने के लिए तहरीर को ट्वीट भी किया गया। वहीं पीड़ित पत्रकार ने जब थाना माल प्रभारी निरीक्षक से उक्त मामले से अवगत कराते हुए वार्ता की तो प्रभारी निरीक्षक शमीम खान ने बताया कि हमें कोई भी तहरीर नहीं प्राप्त हुई है।
आपको बता दें बीते रविवार को पत्रकार नरेंद्र कुमार व उनके साथी पत्रकार निखिल मिश्रा ने जमीनी विवाद को लेकर मीडिया के वॉट्सएप ग्रुप्स पर पीड़ित की बाइट के साथ ब्रेकिंग न्यूज साझा की थी। जिससे बौखलाए विपक्षी दबंग ने एक लिखित प्रार्थना पत्र में कुछ लाइन लिख कर दोनों पत्रकारों पर रंगदारी का झूठा आरोप लगा कर सामाजिक छवि धूमिल करते हुए मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास कर तथाकथित लोगों से उस शिकायती पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल करवा दिया। लेकिन पत्रकारों ने न झुकते हुए इस शायरी को चरितार्थ किया है कि “गिरा ले मुझे अपनी नजरों से कितना ही, झुकने पर तो मजबूर मैं तुझे भी कर दूंगा, एक बार बदनाम करके तो देख मुझे महफ़िल में, कसम से शहर में मशहूर मैं तुझे भी कर दूंगा” अर्थात् पीड़ित पत्रकार नरेंद्र कुमार ने अपने पत्रकार साथी निखिल मिश्रा व लगभग दो दर्जन से अधिक पत्रकारों के साथ माल थाने पर पहुंच प्रभारी निरीक्षक समीम खान को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर रंगदारी का झूठा आरोप लगाने वाले, सामाजिक छवि धूमिल करने व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की मांग की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर कार्यवाही की मांग की है। पत्रकारों के लिए स्थानीय राजनीति, भ्रष्टाचार और अपराध जैसे मामलों की रिपोर्टिंग करना किसी युद्ध की स्थिति का सामना करने से भी ज्यादा खतरनाक बन गया है। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ऐसे लोगों पर जो उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को धूमिल करने का कार्य कर रहे हैं उन पर कब कार्यवाही करेंगे। अब देखना यह होगा कि पीड़ित दोनों पत्रकारों को न्याय मिल पाता है या नहीं या फिर इस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ लेंगे।
