रंजिशन पूरे परिवार को फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप, पीड़ित महिला ने DIG से लगाई न्याय की गुहार
रंजिशन पूरे परिवार को फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप, पीड़ित महिला ने DIG से लगाई न्याय की गुहार
संवाददाता, सुल्तानपुर/अयोध्या
जनपद सुल्तानपुर के थाना मोतिगरपुर अंतर्गत दियरा बाजार में पुरानी रंजिश और व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता के चलते एक ही परिवार के कई सदस्यों को कथित तौर पर झूठे मुकदमे में फंसाने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला ने स्थानीय पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अयोध्या परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (DIG) को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पीड़ित महिला श्रीमती मिथलेश जायसवाल पत्नी अटल जायसवाल निवासी दियरा बाजार का आरोप है कि विपक्षी सतीश कुमार बरनवाल पुत्र कामता प्रसाद बरनवाल पुरानी मुकदमेबाजी को लेकर उनके परिवार से रंजिश रखता है। इसी रंजिश के चलते पूरे परिवार को योजनाबद्ध तरीके से मुकदमे में फंसाया गया है।
15 दिन बाद दर्ज हुई FIR, उठे सवाल
पीड़ित पक्ष के अनुसार, विपक्षी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमा मु0अ0सं0-0096/2026 और उससे जुड़ी पुलिस कार्रवाई में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। कथित घटना की तारीख 30 अप्रैल 2026 बताई गई है। घायल का मेडिकल परीक्षण भी उसी दिन शाम 07:40 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोतिगरपुर में कराया गया। इसके बावजूद एफआईआर 15 दिन बाद, 15 मई 2026 की रात 09:35 बजे दर्ज की गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस दौरान पुलिस और विपक्षी पक्ष ने मिलकर एक “झूठी कहानी” तैयार की और पूरे परिवार को मुकदमे में नामजद कर दिया।
मेडिकल रिपोर्ट ने कमजोर किए गंभीर आरोप
शिकायती पत्र के मुताबिक विपक्षी पक्ष ने एफआईआर में लाठी-डंडों से सिर और रीढ़ पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टर ने चोटों को “Simple in Nature” यानी साधारण प्रकृति का बताया है। रिपोर्ट में कोई भी गंभीर या जानलेवा चोट दर्ज नहीं पाई गई। इसी आधार पर पीड़ित पक्ष का कहना है कि मुकदमे को जानबूझकर गंभीर रंग देकर परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई है।
पूरे परिवार को फंसाने की साजिश का आरोप
महिला का कहना है कि उनके बेटों सौरभ, ऋषभ उर्फ छोटू, नितेश और अन्य परिवारजनों को भी मुकदमे में घसीटा गया है, जबकि घटना के समय कई लोग मौके पर मौजूद ही नहीं थे।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि पूरे परिवार के कमाऊ और युवा सदस्यों को मुकदमे में शामिल कर आर्थिक और मानसिक रूप से तबाह करने की कोशिश की जा रही है।
पीड़ित पक्ष की प्रमुख मांगें
मोतिगरपुर थाने से विवेचना हटाकर किसी निष्पक्ष एजेंसी या क्षेत्राधिकारी (CO स्तर) के अधिकारी को सौंपी जाए।
नामजद युवकों की CDR और टावर लोकेशन की जांच कराई जाए।
आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित कर निष्पक्ष जांच की जाए।
जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। फिलहाल पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए न्याय की उम्मीद जताई है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में सामने आए सवालों पर क्या कार्रवाई करता है।
वहीं पूरे मामले में सुल्तानपुर पुलिस अधिकारी का कहना है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा लिखा गया है। विवेचना में सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जाएगी। हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि जांच कब तक होगी और गलत एफआईआर लिखाने वाले के ऊपर क्या कार्रवाई की जाएगी।
संवाददाता टिप्पणी
घटना और मेडिकल परीक्षण एक ही दिन होने के बावजूद 15 दिन बाद एफआईआर दर्ज होना, साथ ही मेडिकल रिपोर्ट में चोटों का साधारण पाया जाना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
